*स्व-आत्मा में रमण करने के लिए है यह चातुर्मास - साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी* *प्राचीन श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पुण्य धरा पर 4 माह …
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