न्यायपीठ बाल कल्याण समिति झाबुआ में “वीर बाल दिवस” पर कार्यक्रम आयोजित किया गया


झाबुआ। बच्चों में अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च आदर्श के गुण होना आवश्यक है।
उक्त बात न्यायपीठ बाल कल्याण समिति झाबुआ म.प्र. की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति चौहान द्वारा निराश्रित बाल आश्रम (महिला मंडल) झाबुआ द्वारा संचालित शाला के बच्चों को “वीर बाल दिवस” के अवसर पर कही गई।
न्यायपीठ सदस्य एवं एडवोकेट चंचल भंडारी द्वारा बच्चों को बताया गया कि प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को आयोजित “वीर बाल दिवस” हमें याद दिलाता है कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। सिखों के 10 वें गुरु एवं खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों- जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने मात्र 6 और 9 वर्ष की उम्र में धर्म, आस्था और सत्य के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। साथ ही न्यायपीठ सदस्य श्रीमती सपना भट्ट द्वारा बच्चों को गुड टच एवं बेड टच की जानकारी से अवगत कराया गया। इस अवसर पर न्यायपीठ सदस्य श्रीमती पूजा चौहान, सुरेंद्र सिंह भूरिया एवं समस्त शाला शिक्षिकाएं उपस्थित रही।
